भारतीय बंदरगाहों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से रूपांतरित होने की आवश्यकता

पाठ्यक्रम: GS3/अवसंरचना

संदर्भ

  • विगत कुछ वर्षों में भारत के प्रमुख बंदरगाह “स्मार्ट पोर्ट” में रूपांतरित हो चुके हैं, जहाँ सूचना प्रौद्योगिकी और स्वचालन ने दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

परिचय

  • राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स पोर्टल (मरीन), सागर सेतु और ई-समुद्र जैसे प्लेटफ़ॉर्म ने बंदरगाह संचालन को डिजिटाइज कर दिया है।
    • हालाँकि, आगामी चरण “इंटेलीजेंट पोर्ट्स” (Intelligent Ports) का है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा संचालित होंगे और डिजिटलीकरण से डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण की ओर अग्रसर होंगे।

बंदरगाहों में AI की आवश्यकता क्यों है?

  • परियोजना नियोजन और पूर्वानुमान आधारित निर्णय-निर्माण को सुदृढ़ करता है।
  • भीड़-भाड़ का पूर्वानुमान और जस्ट-इन-टाइम बर्थिंग सक्षम करता है, जिससे टर्नअराउंड समय घटता है।
  • व्यापार सुविधा और सुरक्षा व पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन में सुधार करता है।
  • ऊर्जा अनुकूलन और लागत में कमी में सहायक होता है।

बंदरगाहों में प्रमुख डिजिटल सुधार

  • नियामक अनुमोदनों के लिए समुद्री एकल खिड़की का कार्यान्वयन।
  • ONOD (एक राष्ट्र, एक दस्तावेज़ और ONOP (एक राष्ट्र, एक प्रक्रिया) का परिचय, जिससे दस्तावेज़ीकरण का मानकीकरण।
  • सीमा शुल्क, आव्रजन और बंदरगाह प्राधिकरणों में अनावश्यक कागज़ी कार्यों में कमी।
  • मैनुअल से पूर्णतः डिजिटल कार्यप्रवाह की ओर बदलाव, जिससे पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि।

भारत का बंदरगाह क्षेत्र

  • भारत में 14 प्रमुख बंदरगाह हैं, जिनमें से 12 संचालित हैं, और लगभग 200 गैर-प्रमुख (लघु) बंदरगाह हैं।
  • प्रशासनिक नियंत्रण: प्रमुख बंदरगाह पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन हैं, जबकि गैर-प्रमुख बंदरगाह संबंधित राज्य समुद्री बोर्ड/राज्य सरकार के अधीन आते हैं।
  • रणनीतिक स्थिति: विश्व की सबसे व्यस्त नौवहन मार्गों पर स्थित होने के कारण भारत एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र और उभरती वैश्विक शक्ति है।
  • समुद्री क्षेत्र का अवलोकन: भारत के व्यापार का 95% आयतन और 70% मूल्य समुद्री मार्ग से होता है, जिससे बंदरगाह अवसंरचना अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • बंदरगाह रैंकिंग में सुधार: भारत की बंदरगाह रैंकिंग 2014 में 54वें स्थान से 2023 में 38वें स्थान पर पहुँची, और अब नौ भारतीय बंदरगाह विश्व के शीर्ष 100 में शामिल हैं।
  • कार्गो हैंडलिंग में वृद्धि: 2014-15 से 2023-24 के बीच प्रमुख बंदरगाहों की वार्षिक कार्गो-हैंडलिंग क्षमता में 87.01% की वृद्धि हुई।
  • महत्व: भारत 16वाँ सबसे बड़ा समुद्री राष्ट्र है और वैश्विक नौवहन में प्रमुख स्थान रखता है।
  • भविष्य के लक्ष्य: भारत ने 2035 तक बंदरगाह अवसंरचना परियोजनाओं में 82 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश का लक्ष्य रखा है।
  • भारत आगामी दशक में कम से कम 1,000 जहाज़ों का बेड़ा बढ़ाने हेतु नई शिपिंग कंपनी स्थापित करने की योजना बना रहा है।

चुनौतियाँ

  • अवसंरचना अंतराल: अपर्याप्त बंदरगाह अवसंरचना और कुछ बंदरगाहों पर पुरानी सुविधाएँ, जिससे क्षमता और दक्षता सीमित होती है।
  • भीड़-भाड़: प्रमुख बंदरगाहों पर उच्च यातायात मात्रा से विलंब, टर्नअराउंड समय में वृद्धि और उत्पादकता में कमी।
  • पर्यावरणीय चिंताएँ: प्रदूषण और स्थिरता संबंधी मुद्दे, जिनमें जहाज़ों और बंदरगाह संचालन से उत्सर्जन शामिल हैं।
  • लॉजिस्टिक्स बाधाएँ: बंदरगाहों, सड़कों और रेलमार्गों के बीच अक्षम परिवहन संपर्क, जिससे कार्गो की सुगम आवाजाही प्रभावित होती है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: अन्य वैश्विक समुद्री केंद्रों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, जिसके लिए निरंतर निवेश और आधुनिकीकरण आवश्यक है।

सरकार की पहलें

  • सागरमाला कार्यक्रम: भारत की तटरेखा और नौगम्य जलमार्गों का लाभ उठाने पर केंद्रित।
  • बंदरगाह अवसंरचना, तटीय विकास और संपर्कता को समर्थन।
  • तटीय बर्थ, रेल/सड़क संपर्क, मछली बंदरगाह और क्रूज़ टर्मिनल जैसी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता।
  • मैरिटाइम इंडिया विज़न 2030 (MIV 2030): 2030 तक भारत को शीर्ष 10 जहाज़ निर्माण राष्ट्र बनाने और विश्वस्तरीय, दक्ष एवं सतत् समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का लक्ष्य।
  • इसमें दस प्रमुख समुद्री क्षेत्रों में 150+ पहलें शामिल हैं।
  • अंतर्देशीय जलमार्ग विकास: अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा 26 नए राष्ट्रीय जलमार्गों की पहचान।
  • वैकल्पिक, सतत् परिवहन प्रदान करता है, जिससे सड़क/रेल भीड़-भाड़ कम होती है।
  • ग्रीन टग ट्रांज़िशन कार्यक्रम (GTTP): ईंधन-आधारित हार्बर टग्स को पर्यावरण-अनुकूल, सतत् ईंधन-चालित टग्स से प्रतिस्थापित करने का लक्ष्य।
  • 2040 तक प्रमुख बंदरगाहों में संक्रमण पूरा किया जाएगा।
  • सागरमंथन संवाद: वार्षिक समुद्री रणनीतिक संवाद, जिससे भारत को वैश्विक समुद्री चर्चाओं का केंद्र बनाया जा सके।
  • मैरिटाइम विकास कोष: ₹25,000 करोड़ का कोष, दीर्घकालिक वित्तपोषण हेतु, बंदरगाह और नौवहन अवसंरचना के आधुनिकीकरण के लिए, निजी निवेश को प्रोत्साहित करता है।
  • जहाज़ निर्माण वित्तीय सहायता नीति (SBFAP 2.0): भारतीय शिपयार्ड्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाने हेतु आधुनिकीकृत।

स्रोत: TH

 

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